हे अच्युत प्रभु, यह आश्चर्य की बात नहीं है कि आप अपने उन भक्तों के पास घनिष्ठतापूर्वक जाते हैं जिन्होंने सिर्फ़ और सिर्फ़ आपकी शरण ग्रहण कर रखी है। जब आप भगवान रामचंद्र के रूप में प्रकट हुए थे, उस समय ब्रह्मा जैसे महान देवता भी आपके चरणों में अपने मुकुट के शानदार सिरे रखने के लिए लालायित रहते थे; तब आपने हनुमान जैसे बंदरों पर विशेष प्रेम प्रदर्शित किया क्योंकि उन्होंने सिर्फ़ आपकी शरण ग्रहण कर रखी थी।
O infallible Lord, it is not surprising that You approach intimately Your servants who have taken refuge in You alone. During the period when You appeared as Lord Ramacandra, great demigods like Brahma were eager to place the opulent ends of their crowns on Your feet; You showed special affection to monkeys like Hanuman because they had taken refuge in You alone.
तात्पर्य
भगवान के भक्त भगवान की अकारण दया से पूर्ण रूप से सफल हो जाते हैं। कभी-कभी भगवान कृष्ण अपने महान भक्तों के अधीनता की स्थिति स्वीकार करते हैं, जैसे कि नंद महाराज, गोपियों, बाली महाराज और अन्य। यद्यपि भगवान ब्रह्मा जैसे देवता भगवान के चरण कुशन को अपने हेलमेट से छूने के लिए कतार में खड़े थे, तब भी भगवान रामचंद्र ने हनुमान के नेतृत्व वाले बंदरों जैसे उप-मनुष्यों को अपनी घनिष्ठ मित्रता प्रदान की। इसी तरह भगवान कृष्ण का हिरण और गायों के प्रति स्नेह और यहाँ तक कि वृंदावन के पेड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है। इसके अलावा, भगवान ने खुशी-खुशी अर्जुन के रथ को चलाया और राजा युधिष्ठिर के दूत और वफादार अधीनस्थ के रूप में काम किया। ऐसे भक्तों को विस्तृत ज्ञान-योग प्रणालियों या रहस्यमयी शक्तियों को प्राप्त करने की प्रक्रिया की कोई आवश्यकता नहीं है। इन सभी भक्तों को यहाँ श्री उद्धव द्वारा दर्शाया गया है, जो स्पष्ट रूप से भगवान को सूचित करते हैं कि दार्शनिक अटकल और रहस्यवादी योग की परिष्कृत प्रणालियाँ उस व्यक्ति के लिए आकर्षक नहीं होती हैं जिसने भगवान की प्रत्यक्ष प्रेममयी सेवा का स्वाद विकसित किया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥