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bhagavat 11.29.27: जो व्यक्ति इस स्पष्ट तथा पवित्र परम ज्ञान को जोर-जोर से पढ़ता है, वह दिन-प्रतिदिन पवित्र होता जाता है, क्योंकि वह परम ज्ञान रूपी दिव्य दीपक से दूसरों के समक्ष मुझे उजागर करता है।   |   bhagavat अध्याय 11.29: भक्ति-योग   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 29: भक्ति-योग  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  11.29.27 
य एतत् समधीयीत पवित्रं परमं शुचि ।
स पूयेताहरहर्मां ज्ञानदीपेन दर्शयन् ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति इस स्पष्ट तथा पवित्र परम ज्ञान को जोर-जोर से पढ़ता है, वह दिन-प्रतिदिन पवित्र होता जाता है, क्योंकि वह परम ज्ञान रूपी दिव्य दीपक से दूसरों के समक्ष मुझे उजागर करता है।
 
He who loudly recites this clarifying and purifying Supreme Knowledge becomes purer day by day, as he reveals Me to others with the lamp of divine knowledge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)