श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 29: भक्ति-योग  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  11.29.25 
सुविविक्तं तव प्रश्न‍ं मयैतदपि धारयेत् ।
सनातनं ब्रह्मगुह्यं परं ब्रह्माधिगच्छति ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी तुम्हारे सवालों का इन साफ़-साफ़ उत्तरों पर अपना ध्यान केंद्रित करता है, वह वेदों के चिरकालिक गुप्त लक्ष्य-परमब्रह्म को प्राप्त कर लेगा।
 
Anyone who concentrates his attention on these clear answers to your questions will attain the eternal secret goal of the Vedas—the Supreme Brahman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)