प्रायश: पुण्डरीकाक्ष युञ्जन्ते योगिनो मन: ।
विषीदन्त्यसमाधानान्मनोनिग्रहकर्शिता: ॥ २ ॥
अनुवाद
हे कमल नयन वाले भगवान, सामान्यतः वे योगीजन जो मन को स्थिर करने का प्रयास करते हैं, समाधि की दशा पूर्ण करने में अपनी असमर्थता के कारण निराशा का अनुभव करते हैं। इस प्रकार वे मन को वश में करने के प्रयास में थक जाते हैं।
O Lotus-eyed Lord, generally yogis who try to stabilize their minds have to experience frustration due to their inability to achieve the state of meditation. Thus they get tired of trying to control their minds.
तात्पर्य
श्री भगवान की शरण के बगैर योगी लोग परमेश्वर में अपने चित्त को नियत करने के कठिन कार्यों से निराश हो जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥