श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 29: भक्ति-योग  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.29.18 
सर्वं ब्रह्मात्मकं तस्य विद्ययात्ममनीषया ।
परिपश्यन्नुपरमेत् सर्वतो मुक्तसंशय: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान के सर्वव्यापी व्यक्तित्व के दिव्य ज्ञान से व्यक्ति परब्रह्म को हर जगह देख पाता है। इस प्रकार सभी संशयों से मुक्त होकर वह इच्छित फल की कामना वाले कर्मों का त्याग कर देता है।
 
With such divine knowledge of the omnipresent God, man can see the Supreme Being everywhere. Free from all doubts, he abandons selfish actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)