Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.29.18: भगवान के सर्वव्यापी व्यक्तित्व के दिव्य ज्ञान से व्यक्ति परब्रह्म को हर जगह देख पाता है। इस प्रकार सभी संशयों से मुक्त होकर वह इच्छित फल की कामना वाले कर्मों का त्याग कर देता है। | bhagavat अध्याय 11.29: भक्ति-योग । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान के सर्वव्यापी व्यक्तित्व के दिव्य ज्ञान से व्यक्ति परब्रह्म को हर जगह देख पाता है। इस प्रकार सभी संशयों से मुक्त होकर वह इच्छित फल की कामना वाले कर्मों का त्याग कर देता है।
With such divine knowledge of the omnipresent God, man can see the Supreme Being everywhere. Free from all doubts, he abandons selfish actions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥