मेरी शरण में आ चुका योगी इसलिए लालसा से रहित रहता है क्योंकि वह भीतर से ही आत्मा के सुख का अनुभव करता है। इस तरह इस योग-विधि को संपन्न करते हुए वह कभी भी बाधाओं से पराजित नहीं होता।
The Yogi who has surrendered to me is free from desire because he experiences the bliss of the soul within. Thus, while performing this method of Yoga, he is never defeated by obstacles.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, सर्वोच्च प्रभु ने उद्धव को संक्षेप में सभी उपनिषदों के आवश्यक ज्ञान का वर्णन किया है, इस निष्कर्ष के साथ कि प्रभु के प्रति शुद्ध भक्ति सेवा ही परम मोक्ष का वास्तविक साधन है। इस संबंध में श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर इस बात पर जोर देते हैं कि यद्यपि हठ-योगी और राज-योगी अपने निर्धारित मार्गों पर प्रगति करने का प्रयास करते हैं, लेकिन वे बाधाओं का सामना करते हैं और अक्सर अपने इच्छित लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं। हालाँकि, जो सर्वोच्च प्रभु के प्रति समर्पण करता है, वह निश्चित रूप से घर वापस आने के अपने आध्यात्मिक पथ पर विजयी होगा, वापस भगवान् के पास।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध ग्यारह के अंतर्गत अट्ठाईसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥