श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 28: ज्ञान-योग  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  11.28.41 
केचिद् देहमिमं धीरा: सुकल्पं वयसि स्थिरम् ।
विधाय विविधोपायैरथ युञ्जन्ति सिद्धये ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
विभिन्न उपायों से, कुछ योगी अपने शरीर को बीमारी और बुढ़ापे से मुक्त रखते हैं और उसे हमेशा जवान बनाए रखते हैं। इस प्रकार, वे भौतिक योग-सिद्धियों को प्राप्त करने के उद्देश्य से योग का अभ्यास करते हैं।
 
Some Yogis free their bodies from disease and old age by various means and keep them eternally young. In this way, they engage in Yoga with the objective of attaining physical Yogic siddhis.
तात्पर्य
यहां जो प्रक्रिया बताई गई है वो भौतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए है, आपको परमज्ञान दिलाने के लिए नहीं। इसलिए, श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर के अनुसार, यह प्रक्रिया भगवान के प्रति भक्ति सेवा के रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती है। सभी रहस्यमय सिद्धियों के बावजूद, भौतिक शरीर अंततः मर जाएगा। वास्तविक अविनाशी यौवन और खुशी केवल कृष्ण चेतना के आध्यात्मिक स्तर पर ही उपलब्ध है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)