सर्वोच्च भगवान हर जीवित इकाई का शुभचिंतक है, और इसलिए उसके आज्ञा का पालन करना अच्छा है, जबकि उसके आज्ञा की अवहेलना करना बुरा है। भगवान कृष्ण ने वर्णाश्रम-धर्म नामक एक पूर्ण सामाजिक और व्यावसायिक प्रणाली बनाई है, और भगवान ने आगे श्रीमद्भगवद्गीता और अन्य साहित्य में पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान दिया है। भगवान कृष्ण के आज्ञा का पालन करने से मानव समाज में पूर्ण सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक सफलता आएगी। हमें सर्वोच्च व्यक्तित्व के आज्ञा के बाहर स्वयंभू अच्छे को मूर्खतापूर्वक नहीं देखना चाहिए। ऐसे आज्ञा को ईश्वर का कानून कहा जाता है और धर्म का सार या तत्व है।
