Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 11.28.39: इन अवरोधों में से कुछ का निवारण योग ध्यान या शारीरिक आसनों से किया जा सकता है, जिनका अभ्यास प्राणायाम पर ध्यान लगाते हुए किया जाता है। अन्य अवरोधों को विशेष तपस्या, मंत्र या औषधीय जड़ी-बूटियों से दूर किया जा सकता है।   |   bhagavat अध्याय 11.28: ज्ञान-योग   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 28: ज्ञान-योग  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  11.28.39 
योगधारणया कांश्चिदासनैर्धारणान्वितै: ।
तपोमन्त्रौषधै: कांश्चिदुपसर्गान् विनिर्दहेत् ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
इन अवरोधों में से कुछ का निवारण योग ध्यान या शारीरिक आसनों से किया जा सकता है, जिनका अभ्यास प्राणायाम पर ध्यान लगाते हुए किया जाता है। अन्य अवरोधों को विशेष तपस्या, मंत्र या औषधीय जड़ी-बूटियों से दूर किया जा सकता है।
 
Some of these disturbances can be removed by yogic meditation or physical postures practiced along with concentration in pranayama, and others can be removed by special austerities, mantras or herbal medicines.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)