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bhagavat 11.28.34: जब सूरज निकलता है, तो वो अंधेरे को दूर कर देता है जो मनुष्यों की आंखों को ढके रहता है। लेकिन, वो उन चीजों को नहीं बनाता जिन्हें हम अपने सामने देखते हैं, क्योंकि वो चीजें पहले से ही वहाँ मौजूद होती हैं। उसी तरह से, मेरे अस्तित्व का शक्तिशाली और वास्तविक एहसास इंसान की सच्ची चेतना से अंधेरे को दूर कर देगा।   |   bhagavat अध्याय 11.28: ज्ञान-योग   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 28: ज्ञान-योग  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  11.28.34 
यथा हि भानोरुदयो नृचक्षुषां
तमो निहन्यान्न तु सद् विधत्ते ।
एवं समीक्षा निपुणा सती मे
हन्यात्तमिस्रं पुरुषस्य बुद्धे: ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
जब सूरज निकलता है, तो वो अंधेरे को दूर कर देता है जो मनुष्यों की आंखों को ढके रहता है। लेकिन, वो उन चीजों को नहीं बनाता जिन्हें हम अपने सामने देखते हैं, क्योंकि वो चीजें पहले से ही वहाँ मौजूद होती हैं। उसी तरह से, मेरे अस्तित्व का शक्तिशाली और वास्तविक एहसास इंसान की सच्ची चेतना से अंधेरे को दूर कर देगा।
 
When the sun rises, it destroys the darkness covering man's eyes, but it does not create the things that man sees before him because they were already there. In the same way, My powerful and accurate realization will destroy the darkness covering man's true consciousness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)