Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.28.24: पृथ्वी से बना हुआ भौतिक शरीर सच्ची आत्मा नहीं है। इंद्रियां और उनके नियंत्रक देवता और जीवन की वायु भी आत्मा नहीं है। इसी प्रकार, बाहरी हवा, पानी और आग या मन भी आत्मा नहीं है। यह सभी केवल पदार्थ हैं। उसी प्रकार, न तो बुद्धि, न ही भौतिक चेतना, न ही अहंकार, न ही आकाश या पृथ्वी के तत्व, न ही इंद्रिय अनुभव की वस्तुएं और न ही भौतिक संतुलन की प्रारंभिक अवस्था को आत्मा की वास्तविक पहचान माना जा सकता है। | bhagavat अध्याय 11.28: ज्ञान-योग । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नात्मा वपु: पार्थिवमिन्द्रियाणि
देवा ह्यसुर्वायुर्जलम् हुताश: ।
मनोऽन्नमात्रं धिषणा च सत्त्व-
महङ्कृति: खं क्षितिरर्थसाम्यम् ॥ २४ ॥
अनुवाद
पृथ्वी से बना हुआ भौतिक शरीर सच्ची आत्मा नहीं है। इंद्रियां और उनके नियंत्रक देवता और जीवन की वायु भी आत्मा नहीं है। इसी प्रकार, बाहरी हवा, पानी और आग या मन भी आत्मा नहीं है। यह सभी केवल पदार्थ हैं। उसी प्रकार, न तो बुद्धि, न ही भौतिक चेतना, न ही अहंकार, न ही आकाश या पृथ्वी के तत्व, न ही इंद्रिय अनुभव की वस्तुएं और न ही भौतिक संतुलन की प्रारंभिक अवस्था को आत्मा की वास्तविक पहचान माना जा सकता है।
The material body made of earth is not the real self, nor are the senses, their presiding deities or the vital airs; nor are the external air, water, or fire, or the mind. These are all matter. Likewise, neither the human intellect, nor the material consciousness, nor the ego, nor the elements of sky or earth, nor the objects of sense perception, nor the primitive state of material equilibrium can be regarded as the real identity of the self.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥