न यत् पुरस्तादुत यन्न पश्चा-
न्मध्ये च तन्न व्यपदेशमात्रम् ।
भूतं प्रसिद्धं च परेण यद् यत्
तदेव तत् स्यादिति मे मनीषा ॥ २१ ॥
अनुवाद
जो अतीत में नहीं था और भविष्य में भी नहीं रहेगा, उसका अपने अस्तित्व की अवधि में भी कोई अस्तित्व नहीं होता, वह केवल एक ऊपरी नाम होता है। मेरे विचार से जो कुछ भी बनाया जाता है और किसी अन्य वस्तु से प्रकट होता है वह अंततः केवल वही अन्य वस्तु होती है।
That which did not exist in the past and will not exist in the future has no existence in its entire duration; it is only an appearance. In my opinion whatever is produced and emanated from something else is ultimately the only other thing.
तात्पर्य
हालाँकि सभी भौतिक उत्पाद, जैसे हमारा अपना शरीर, अस्थायी हैं और इस प्रकार अंततः मिथ्या हैं, भौतिक दुनिया प्रभु की शक्ति का एक वास्तविक प्रकटीकरण है। इस दुनिया का मूल पदार्थ, या वास्तविकता, स्वयं भगवान का व्यक्तित्व है, जबकि इस भौतिक दुनिया में जो अस्थायी नामकरण है, वह सभी भ्रम है। इस प्रकार हम खुद को अमेरिकी, रूसी, ब्रिटिश, जर्मन, भारतीय, काला, गोरा, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि मानते हैं। वास्तव में, हम परम प्रभु की सीमांत शक्ति हैं, लेकिन भगवान की निम्न भौतिक शक्ति का दोहन करने के प्रयास में हम भ्रम में फंस गए हैं। हर चीज को भगवान के व्यक्तित्व के संदर्भ में ठीक से परिभाषित किया जाना चाहिए, जो इस और अन्य सभी दुनिया की आवश्यक वास्तविकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥