यथा हिरण्यं स्वकृतं पुरस्तात्
पश्चाच्च सर्वस्य हिरण्मयस्य ।
तदेव मध्ये व्यवहार्यमाणं
नानापदेशैरहमस्य तद्वत् ॥ १९ ॥
अनुवाद
ठीक उसी तरह जैसे सोना आभूषणों के निर्माण से पहले अकेला रहता है, और जब ये आभूषण नष्ट हो जाते हैं, तब भी सिर्फ सोना ही रहता है। और जब विभिन्न नामों से इस्तेमाल भी किया जाता है, तब भी सिर्फ सोना ही मूल तत्व होता है। उसी तरह इस ब्रह्मांड की रचना से पहले, उसके विनाश के बाद और उसके अस्तित्व के दौरान भी केवल मैं ही विद्यमान हूं।
Just as before gold articles are made, there is only one gold, when these articles are destroyed, there remains only one gold, and when used under various names, there is only one gold which is the essential Truth, so I alone exist before the creation of this universe, after its destruction, and during its existence.
तात्पर्य
सोना अनेक प्रकार के आभूषणों, सिक्कों और अन्य महंगे उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है। परंतु हर स्थिति में- निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान, उपयोग किए जाने के दौरान और बाद में- मूल रूप से वह सोना ही होता है। ठीक उसी प्रकार, भगवान श्री कृष्ण मूल रूप से सत्य हैं- दोनों गतिशील हैं और सभी के अवयव हैं। संपूर्ण भौतिक सृष्टि में, प्रभु केवल अपनी शक्ति को गति प्रदान कर रहे हैं, जो कि स्वयं उनसे अलग नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥