ज्ञानं विवेको निगमस्तपश्च
प्रत्यक्षमैतिह्यमथानुमानम् ।
आद्यन्तयोरस्य यदेव केवलं
कालश्च हेतुश्च तदेव मध्ये ॥ १८ ॥
अनुवाद
वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान वही है जो आत्मा और पदार्थ के विवेक पर आधारित होता है तथा इसे शास्त्रों के प्रमाणों, तपस्या द्वारा, प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा, पुराणों की ऐतिहासिक कहानियों के संग्रह द्वारा व तार्किक निष्कर्षों द्वारा विकसित किया जाता है। परब्रह्म, जो इस ब्रह्मांड की रचना से पहले एकमात्र अस्तित्व में था और जो इसके विनाश के बाद भी रहेगा, वही समय और परम कारण भी है। यहाँ तक कि इस सृष्टि के मध्य में भी एकमात्र परब्रह्म ही वास्तविक सत्य है।
Real spiritual knowledge is based on the discrimination between soul and matter and is practiced through scriptural evidence, penance, direct experience, collection of historical accounts from Puranas and logical conclusions. Parabrahma, who alone existed before the creation of this universe and who will remain even after its destruction, is also the time and the ultimate cause. Even in the midst of this universe, only Parabrahma is the real truth.
तात्पर्य
भौतिक विज्ञानी और दार्शनिक उत्सुकता से उस सर्वोच्च भौतिक कारण या सिद्धांत की खोज कर रहे हैं, जिसका वर्णन यहाँ काल के रूप में किया गया है, समय का कारक। कारण और प्रभाव की भौतिक प्रक्रिया पूरी तरह से समय के अनुक्रम में होती है; दूसरे शब्दों में, समय कारक भौतिक कारण और प्रभाव के लिए प्रेरक प्रेरणा है। यह समय कारक परमात्मा की अभिव्यक्ति है, जो सर्वोच्च भगवान का वह रूप है जो ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति में व्याप्त और उसका समर्थन करता है। यहाँ ज्ञान प्राप्त करने की विधि को वैज्ञानिक रूप से वर्णित किया गया है, और जो गंभीर, तर्कसंगत विद्वान हैं वे भगवान द्वारा यहाँ प्रकट किए गए पारलौकिक ज्ञानमीमांसा का लाभ उठाएँगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥