यथा ह्यप्रतिबुद्धस्य प्रस्वापो बह्वनर्थभृत् ।
स एव प्रतिबुद्धस्य न वै मोहाय कल्पते ॥ १४ ॥
अनुवाद
हालांकि सपने देखते समय व्यक्ति कई अनपेक्षित चीजों का अनुभव करता है, लेकिन जागने के बाद वह सपने के अनुभवों से ज़रा भी परेशान नहीं होता।
Although a person experiences many unwanted things while dreaming, yet after waking up he is not at all disturbed by the dream experiences.
तात्पर्य
एक मुक्त आत्मा को भी इस संसार में रहते हुए भौतिक वस्तुओं का अवलोकन करना होगा। परन्तु कृष्ण भावना में सचेत रहकर, वह समझता है कि इंद्रियों के सुख-दुख स्वप्नों की भांति ही निराधार हैं। इस प्रकार मुक्त आत्मा भ्रम से विचलित नहीं होता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥