वैदिकस्तान्त्रिको मिश्र इति मे त्रिविधो मख: ।
त्रयाणामीप्सितेनैव विधिना मां समर्चरेत् ॥ ७ ॥
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि जिन तीनों विधियों में, अर्थात् वैदिक, तांत्रिक और मिश्रित, मैं यज्ञ ग्रहण करता हूँ, उनमें से किसी एक का चयन करके सावधानीपूर्वक मेरी आराधना करे।
One must carefully worship Me, choosing any one of the three methods by which I obtain sacrifices, viz. Vedic, Tantric or mixed.
तात्पर्य
वैदिक का तात्पर्य चार वेदों और सहायक वैदिक साहित्य के मन्त्रों से किए जाने वाले यज्ञ से है। तांत्रिक का तात्पर्य पंचरात्र और गौतमीय-तंत्र जैसे साहित्य से है। और "मिश्रित" का तात्पर्य दोनों साहित्यों के उपयोग से है। यह याद रखना चाहिए कि विस्तृत वैदिक यज्ञों की सतही नकल से जीवन की वास्तविक सिद्धि प्राप्त नहीं होती। सर्वोच्च भगवान के निर्देशानुसार यज्ञ करना चाहिए, जो इस युग के लिए उनके पवित्र नामों के जप की अनुशंसा करते हैं: हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे/ हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥