केवल चोरी करने वाला ही नहीं बल्कि उसकी सहायता करने वाला, अपराध के लिए उकसाने वाला या उसका अनुमोदन करने वाला भी अगले जीवन में पाप के भागीदार होंगे। भागीदारी की सीमा के अनुसार, उन्हें उसी अनुपात में फल भोगना होगा। भगवान या उनके अधिकारी प्रतिनिधियों की पूजा की वस्तु को किसी भी स्थिति में नहीं चुराना चाहिए।
केवल चोरी करने वाला ही नहीं बल्कि उसकी सहायता करने वाला, अपराध के लिए उकसाने वाला या उसका अनुमोदन करने वाला भी अगले जीवन में पाप के भागीदार होंगे। भागीदारी की सीमा के अनुसार, उन्हें उसी अनुपात में फल भोगना होगा। भगवान या उनके अधिकारी प्रतिनिधियों की पूजा की वस्तु को किसी भी स्थिति में नहीं चुराना चाहिए।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध ग्यारह के अंतर्गत सत्ताईसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।