श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  11.27.51 
पूजादीनां प्रवाहार्थं महापर्वस्वथान्वहम् ।
क्षेत्रापणपुरग्रामान् दत्त्वा मत्सार्ष्टितामियात् ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी देवता को भूमि, बाज़ार, शहर और गाँव का दान देता है ताकि देवता की दैनिक पूजा और विशेष उत्सव निरंतर चलते रहें, वह मेरे ही समान समृद्धि प्राप्त करेगा।
 
One who offers land, markets, cities and villages to the Deity so that the daily worship and special festivals of the Deity may continue uninterrupted will attain prosperity equal to Me.
तात्पर्य
देवता के नाम पर भूमि के पट्टे देने से किराए और कृषि उत्पादन से दोनों रूपों में देवता की विधिवत पूजा के लिए नियमित आय होगी। जो उपासक ऊपर वर्णित व्यवस्था करता है, वह निश्चित रूप से भगवान के व्यक्तित्व की तरह ही संपन्नता प्राप्त करेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)