Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.27.46: अर्चाविग्रह के चरणों पर अपना सिर रख कर, भगवान के सामने हाथ जोड़कर खड़ा होना चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए। "हे प्रभु, मैं आपकी शरण में हूँ। कृपा करके मेरी रक्षा करें। मैं इस भवसागर से बहुत डरता हूँ क्योंकि मैं मृत्यु के मुँह पर खड़ा हूँ।" | bhagavat अध्याय 11.27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्चाविग्रह के चरणों पर अपना सिर रख कर, भगवान के सामने हाथ जोड़कर खड़ा होना चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए। "हे प्रभु, मैं आपकी शरण में हूँ। कृपा करके मेरी रक्षा करें। मैं इस भवसागर से बहुत डरता हूँ क्योंकि मैं मृत्यु के मुँह पर खड़ा हूँ।"
Placing his head on the feet of the Deity and then standing with folded hands before the Lord, he should pray, "O Lord, I take refuge in You. Kindly protect me. I am very afraid of this ocean of existence, for I am standing on the brink of death."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥