विशेष अवसरों पर और यदि सम्भव हो तो प्रतिदिन भगवान की मूर्ति को उबटन लगाया जाए, दर्पण दिखाया जाए, दाँत साफ करने के लिए नीम की दातून दी जाए, पाँच प्रकार के अमृत से स्नान कराया जाए, विभिन्न तरह के उत्तम व्यंजन अर्पित किए जाएँ और संगीत और नृत्य से उनका मनोरंजन किया जाए।
On special occasions and if possible, daily, the Deity should be given an ointment, shown a mirror, given a neem twig to clean the teeth, bathed with five kinds of nectar (panchamrit), offered various high-quality dishes and entertained with singing and dancing.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर मूर्ति पूजा की प्रक्रिया का वर्णन इस प्रकार करते हैं: "सबसे पहले मूर्ति के दाँत साफ करें और उसके शरीर की तेल मालिश करें और सिंदूर, कपूर पाउडर आदि से मलें। फिर उसे सुगंधित पानी और पाँचों प्रकार के अमृत से स्नान कराएँ। इसके बाद देवता को कीमती रेशमी वस्त्र और आभूषण भेंट करें, उसके शरीर पर चंदन का लेप करें और उसे माला और अन्य उपहार भेंट करें। इसके बाद, देवता के सामने एक दर्पण रखें और फिर सुगंधित तेल, फूल, अगरबत्ती, दीपक और मुँह को ताज़ा करने के लिए सुगंधित पानी चढ़ाएँ। सभी प्रकार के स्वादिष्ट भोजन, सुगंधित पानी, सुपारी, माला, आरती के दीपक, विश्राम करने के लिए बिस्तर आदि अर्पित करें। देवता की पंखा करें और संगीत, गायन और नृत्य की प्रस्तुति दें। यह मूर्ति पूजा धार्मिक अवकाशों जैसे विशेष अवसरों पर या फिर यदि वहन कर सकते हैं तो प्रतिदिन करें।" श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, एकादशी विशेष मूर्ति पूजा करने के लिए एक उपयुक्त दिन है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥