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bhagavat 11.27.33: भक्त को मुझे मेरे पाँव तथा मुँह धोने के लिए श्रद्धापूर्वक जल, सुगन्धित तेल, फूल, अक्षत भेंट करना चाहिए और साथ ही अगरबत्ती, दीप और अन्य पूजा सामग्री भी चढ़ानी चाहिए।   |   bhagavat अध्याय 11.27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  11.27.33 
पाद्यमाचमनीयं च गन्धं सुमनसोऽक्षतान् ।
धूपदीपोपहार्याणि दद्यान्मे श्रद्धयार्चक: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
भक्त को मुझे मेरे पाँव तथा मुँह धोने के लिए श्रद्धापूर्वक जल, सुगन्धित तेल, फूल, अक्षत भेंट करना चाहिए और साथ ही अगरबत्ती, दीप और अन्य पूजा सामग्री भी चढ़ानी चाहिए।
 
The worshipper should offer me water for washing my feet and face, fragrant oil, flowers, whole grains as well as aguru, lamp and other gifts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)