Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.27.22: इन तीनों पात्रों को शुद्ध करने के बाद, भक्त को जल के पात्र को शुद्ध करना चाहिए जिसे भगवान के पैर धोने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करने के लिए, उसे "हृदयाय नम:" मंत्र का जाप करना चाहिए। तब उसे जल के पात्र को शुद्ध करना चाहिए जिसे भगवान के लिए अर्घ्य देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करने के लिए, उसे "शिरसे स्वाहा" मंत्र का जाप करना चाहिए। अंत में, उसे जल के पात्र को शुद्ध करना चाहिए जिसे भगवान का मुँह धोने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करने के लिए, उसे "शिखायै वषट्" मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उसे इन तीनों पात्रों के लिए गायत्री मंत्र का भी जाप करना चाहिए। | bhagavat अध्याय 11.27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन तीनों पात्रों को शुद्ध करने के बाद, भक्त को जल के पात्र को शुद्ध करना चाहिए जिसे भगवान के पैर धोने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करने के लिए, उसे "हृदयाय नम:" मंत्र का जाप करना चाहिए। तब उसे जल के पात्र को शुद्ध करना चाहिए जिसे भगवान के लिए अर्घ्य देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करने के लिए, उसे "शिरसे स्वाहा" मंत्र का जाप करना चाहिए। अंत में, उसे जल के पात्र को शुद्ध करना चाहिए जिसे भगवान का मुँह धोने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करने के लिए, उसे "शिखायै वषट्" मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उसे इन तीनों पात्रों के लिए गायत्री मंत्र का भी जाप करना चाहिए।
Then the worshipper should purify these three vessels. He should purify the vessel containing water for washing the feet of the Lord with the mantra Hridaya Namah; the vessel containing water for offering arghya with the mantra Shirse Swaha; and the vessel containing water for washing the face of the Lord with the mantra Shikhaye Vashat. Also, he should recite the Gayatri Mantra for these three vessels.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥