श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 26: ऐल-गीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.26.6 
कामानतृप्तोऽनुजुषन् क्षुल्ल‍कान् वर्षयामिनी: ।
न वेद यान्तीर्नायान्तीरुर्वश्याकृष्टचेतन: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हालांकि पुरूरवा ने कई सालों तक शाम के समय यौन सुख का भोग किया था, फिर भी वह ऐसे तुच्छ भोग से तृप्त नहीं हुआ था। उसका मन उर्वशी के प्रति इतना आकर्षित था कि उसे इस बात का ध्यान ही नहीं रहा कि रातें आती और चली जाती हैं।
 
Although Pururava had enjoyed sexual pleasure in the evening hours for years, he was not satisfied with such trivial pleasures. His mind was so attracted towards Urvashi that he could not even see how the nights came and went.
तात्पर्य
यह श्लोक पुरुरुवा के उर्वशी के साथ भौतिकवादी अनुभव का उल्लेख करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)