निम्नलिखित गीत सुप्रसिद्ध सम्राट पुरूरवा द्वारा गाया गया था। अपनी पत्नी उर्वशी से अलग होने पर पहले तो वह परेशान हो गया था, लेकिन अपने शोक पर नियंत्रण करके वह वैराग्य का अनुभव करने लगा।
The following song was sung by the famous emperor Pururava. At first he was confused when he was separated from his wife Urvashi, but after he subdued his grief he began to feel detachment.
तात्पर्य
ऐसी ही एक कहानी श्रीमद्भागवतम् के नवम स्कंध में भी वर्णित है| ऐला या पुरुरवा एक महान राजा थे जिनकी महिमा अपरंपार थी| उर्वशी से वियोग के बाद उन्हें शुरुआत में बहुत अधिक भ्रम हुआ| परंतु कुरुक्षेत्र में उनसे संक्षिप्त मुलाकात के बाद, उन्होंने गंधर्व द्वारा दिए गए यज्ञ अग्नि से देवताओं की पूजा की और उस ग्रह पर जाने का विशेषाधिकार प्राप्त किया जहाँ उर्वशी निवास करती थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥