Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.26.24: इसलिए मनुष्य को अपनी इन्द्रियों को महिलाओं या उन पुरुषों की संगति में मुक्त रूप से घूमने-फिरने नहीं देना चाहिए, जो महिलाओं में आसक्त हैं। यहाँ तक कि जो लोग बहुत विद्वान हैं, वे भी मन के छह शत्रुओं पर भरोसा नहीं कर सकते, तो मेरे जैसे मूर्ख व्यक्ति के बारे में क्या कहा जा सकता है? | bhagavat अध्याय 11.26: ऐल-गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् सङ्गो न कर्तव्य: स्त्रीषु स्त्रैणेषु चेन्द्रियै: ।
विदुषां चाप्यविस्रब्ध: षड्वर्ग: किमु मादृशाम् ॥ २४ ॥
अनुवाद
इसलिए मनुष्य को अपनी इन्द्रियों को महिलाओं या उन पुरुषों की संगति में मुक्त रूप से घूमने-फिरने नहीं देना चाहिए, जो महिलाओं में आसक्त हैं। यहाँ तक कि जो लोग बहुत विद्वान हैं, वे भी मन के छह शत्रुओं पर भरोसा नहीं कर सकते, तो मेरे जैसे मूर्ख व्यक्ति के बारे में क्या कहा जा सकता है?
Therefore, a man should not allow his senses to freely associate with women or men who are attracted to women. Even those who are very learned cannot believe in the six enemies of the mind, so what can be said about foolish persons like me?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥