क्योंकि मन उन चीज़ों से विचलित नहीं होता जो न तो देखी गई हैं और न ही सुनी गई हैं, इसलिए जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करता है उसका मन अपने भौतिक कर्मों को स्वचालित रूप से रोक देगा और शांत हो जाएगा।
Since the mind is not disturbed by anything that is neither seen nor heard, the mind of a person who restrains his senses will automatically be restrained from performing his material activities and will become tranquil.
तात्पर्य
यह तर्क दिया जा सकता है कि अपनी आँखें बंद करने पर भी, सपने देखते समय या एकांत में रहते हुए व्यक्ति इंद्रिय सुख को याद कर सकता है या उस पर विचार कर सकता है। हालाँकि, ऐसा अनुभव पिछले इंद्रिय सुख के कारण होता है जिसे व्यक्ति ने बार-बार देखा और सुना होगा। जब कोई व्यक्ति इंद्रियों को उनकी वस्तुओं से प्रतिबंधित करता है, विशेष रूप से महिलाओं के साथ अंतरंग संपर्क से, तो मन की भौतिक प्रवृत्ति सुस्त हो जाएगी और ईंधन के बिना आग की तरह अंततः मर जाएगी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥