मुझे धिक्कार है! मैं इतना बड़ा मूर्ख हूँ कि मैंने यह भी नहीं जाना कि मेरे लिए क्या अच्छा है। मैंने तो घमंड से यह सोचा था कि मैं अत्यधिक बुद्धिमान हूँ। यद्यपि मुझे स्वामी का ऊँचा पद प्राप्त हो गया, किन्तु मैं स्त्रियों से अपने को परास्त करवाता रहा मानो मैं कोई बैल या गधा होऊँ।
Shame on me! I am such a fool that I did not even know what was good for me. I had presumptuously thought that I was extremely intelligent. Although I attained the high position of a Swami, I continued to let women defeat me as if I were an ox or a donkey.
तात्पर्य
इस संसार के सभी मूर्ख स्वयं को बहुत विद्वान व्यक्ति समझते हैं, भले ही, इंद्रियों की तृप्ति के नशे में और स्त्रियों के साहचर्य की वासना से उन्मत्त होकर, वे सांडों और गधों के समान हो जाते हैं। एक संत गुरु की कृपा से, यह वासनात्मक प्रवृत्ति धीरे-धीरे दूर की जा सकती है और व्यक्ति भौतिक इंद्रिय तृप्ति की भयानक, घृणित प्रकृति को समझ सकता है। इस श्लोक में राजा पुरूरवा कृष्ण चेतना में अपने होश में आ रहे हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥