Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.25.9: आत्मसंयम जैसे गुणों को प्रदर्शित करने वाला व्यक्ति मुख्य रूप से सतोगुणी होता है। इसी तरह, एक कामुक व्यक्ति अपनी वासना से पहचाना जाता है, और एक अज्ञानी व्यक्ति क्रोध जैसे गुण से पहचाना जाता है। | bhagavat अध्याय 11.25: प्रकृति के तीन गुण तथा उनसे परे । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरुषं सत्त्वसंयुक्तमनुमीयाच्छमादिभि: ।
कामादिभी रजोयुक्तं क्रोधाद्यैस्तमसा युतम् ॥ ९ ॥
अनुवाद
आत्मसंयम जैसे गुणों को प्रदर्शित करने वाला व्यक्ति मुख्य रूप से सतोगुणी होता है। इसी तरह, एक कामुक व्यक्ति अपनी वासना से पहचाना जाता है, और एक अज्ञानी व्यक्ति क्रोध जैसे गुण से पहचाना जाता है।
A person who displays qualities like self-restraint is mainly considered to be of Satva Guna. Similarly, a person of Rajoguni is identified by his lust and a person of Tamoguni is identified by qualities like anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥