Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.25.22: जो लोग अच्छाई की प्रवृति में रहते हुए इस दुनिया को छोड़ते हैं, वे स्वर्गलोक में जाते हैं; जो लोग जुनून की प्रवृति में रहते हुए छोड़ते हैं, वे मानव-लोक में रह जाते हैं और अज्ञानता की प्रवृति में मरने वाले नरक-लोक में जाते हैं। लेकिन जो लोग प्रकृति के सभी गुणों से मुक्त हैं, वे मेरे पास आते हैं। | bhagavat अध्याय 11.25: प्रकृति के तीन गुण तथा उनसे परे । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग अच्छाई की प्रवृति में रहते हुए इस दुनिया को छोड़ते हैं, वे स्वर्गलोक में जाते हैं; जो लोग जुनून की प्रवृति में रहते हुए छोड़ते हैं, वे मानव-लोक में रह जाते हैं और अज्ञानता की प्रवृति में मरने वाले नरक-लोक में जाते हैं। लेकिन जो लोग प्रकृति के सभी गुणों से मुक्त हैं, वे मेरे पास आते हैं।
Those who leave this world in the mode of goodness go to heaven; those who leave in the mode of passion remain in the world of men and those who die in the mode of ignorance go to hell. But those who are free from all the modes of nature come to me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥