| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास » अध्याय 24: सांख्य दर्शन » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 11.24.9  | मया सञ्चोदिता भावाः सर्वे संहत्यकारिणः ।
अण्डमुत्पादयामासुर्ममायतनमुत्तमम् ॥ ९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | मेरे आदेशानुसार, ये तमाम तत्त्व व्यवस्थित ढंग से जुड़े और मिलकर उस विशाल ब्रह्मांड की रचना की, जो मेरा नायाब निवास स्थान है। | | | | मेरे आदेशानुसार, ये तमाम तत्त्व व्यवस्थित ढंग से जुड़े और मिलकर उस विशाल ब्रह्मांड की रचना की, जो मेरा नायाब निवास स्थान है। | | ✨ ai-generated | | |
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