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श्लोक 11.24.6  |
तेभ्यः समभवत् सूत्रं महान् सूत्रेण संयुतः ।
ततो विकुर्वतो जातो योऽहङ्कारो विमोहनः ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| इन गुणों से महत् तत्त्व और आदि सूत्र की उत्पत्ति हुई। महत् तत्त्व के रूपांतर से मिथ्या अहंकार उत्पन्न हुआ और यही जीवों के मोह का कारण बना है। |
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| इन गुणों से महत् तत्त्व और आदि सूत्र की उत्पत्ति हुई। महत् तत्त्व के रूपांतर से मिथ्या अहंकार उत्पन्न हुआ और यही जीवों के मोह का कारण बना है। |
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