अणुर्बृहत् कृशः स्थूलो यो यो भावः प्रसिध्यति ।
सर्वोऽप्युभयसंयुक्तः प्रकृत्या पुरुषेण च ॥ १६ ॥
अनुवाद
इस जगत में जो भी स्वरूप दिखाई देते हैं, चाहे वे छोटे हों या बड़े, हल्के हों या वज़नदार, उनमें भौतिक प्रकृति और इसका भोग करने वाला आत्मा दोनों ज़रूर होते हैं।
Whatever forms exist in this world—whether small or big, thin or fat—they contain both the physical nature and the soul that consumes it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥