Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.9: इस प्रकार से पाँच कुटुम्ब सम्बन्धी हवन के अग्नियों ये देवताओं को उस ब्राह्मण पर बहुत क्रोध आ गया, जो कंजूस होने के कारण यक्ष की तरह अपनी सम्पत्ति की पहरेदारी करता था और न इस लोक में ही उसका कोई अच्छा स्थान था, न पारलोक में ही और जो पूर्णतः धर्म और विषय-भोगों से वंचित हो गया था। | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्यैवं यक्षवित्तस्य च्युतस्योभयलोकत: ।
धर्मकामविहीनस्य चुक्रुधु: पञ्चभागिन: ॥ ९ ॥
अनुवाद
इस प्रकार से पाँच कुटुम्ब सम्बन्धी हवन के अग्नियों ये देवताओं को उस ब्राह्मण पर बहुत क्रोध आ गया, जो कंजूस होने के कारण यक्ष की तरह अपनी सम्पत्ति की पहरेदारी करता था और न इस लोक में ही उसका कोई अच्छा स्थान था, न पारलोक में ही और जो पूर्णतः धर्म और विषय-भोगों से वंचित हो गया था।
Thus, the presiding deity of the five family sacrifices became enraged with the Brahmin, who, being a miser, guarded his wealth like a Yaksh and who had no good destiny either in this world or the next and who had become totally devoid of Dharma and sensual pleasures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥