Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 11.23.7: उसका घर धार्मिकता और वैध इंद्रिय तृप्ति से रहित था। उस घर में पारिवारिक सदस्यों और अतिथियों का उचित सम्मान कभी नहीं किया जाता था, यहाँ तक कि शब्दों से भी नहीं। वह उपयुक्त अवसरों पर अपने शरीर की इंद्रिय तृप्ति भी नहीं होने देता था।   |   bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.23.7 
ज्ञातयोऽतिथयस्तस्य वाङ्‍मात्रेणापि नार्चिता: ।
शून्यावसथ आत्मापि काले कामैरनर्चित: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
उसका घर धार्मिकता और वैध इंद्रिय तृप्ति से रहित था। उस घर में पारिवारिक सदस्यों और अतिथियों का उचित सम्मान कभी नहीं किया जाता था, यहाँ तक कि शब्दों से भी नहीं। वह उपयुक्त अवसरों पर अपने शरीर की इंद्रिय तृप्ति भी नहीं होने देता था।
 
His house was devoid of religion and legitimate sense gratification; there was no proper respect, not even in words, for family members and guests. He did not even allow his own body to be gratified on suitable occasions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)