मनुष्य केवल अपने मानसिक भ्रम के कारण सुख और दुख का अनुभव करता है, किसी अन्य बल के कारण नहीं। मित्र, शत्रु, निष्पक्ष लोग और इनके इर्द-गिर्द बनाया गया भौतिक जीवन - यह सब अज्ञानता के कारण ही होते हैं।
It is man's own mental illusion that makes the soul experience happiness and misery, no one else. His conception of friends, neutrals and enemies, and the material life he builds around these conceptions, all arise out of mere ignorance.
तात्पर्य
हर कोई अपने मित्रों को खुश करने, अपने दुश्मनों को पराजित करने और तटस्थ पक्षों के साथ यथास्थिति बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। ये संबंध निश्चित रूप से भौतिक शरीर पर आधारित हैं और शरीर के अवश्यंभावी निधन से आगे नहीं जाते हैं। उन्हें अज्ञानता या भौतिक भ्रम कहा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥