Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.53: और अगर हम इस विचार को परखें कि ग्रह ही तत्काल सुख और दुख का कारण हैं, तो भी आत्मा, जो शाश्वत है, उससे उनका क्या संबंध है? आख़िरकार, ग्रहों का प्रभाव केवल उन चीजों पर पड़ता है जिनका जन्म हो चुका है। इसके अतिरिक्त, कुशल ज्योतिषियों ने समझाया है कि ग्रह किस प्रकार एक-दूसरे को केवल पीड़ा पहुँचाते हैं। इसलिए, जब जीव इन ग्रहों और भौतिक शरीर से अलग है, तो वह अपना क्रोध किसके प्रति प्रकट करे? | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
और अगर हम इस विचार को परखें कि ग्रह ही तत्काल सुख और दुख का कारण हैं, तो भी आत्मा, जो शाश्वत है, उससे उनका क्या संबंध है? आख़िरकार, ग्रहों का प्रभाव केवल उन चीजों पर पड़ता है जिनका जन्म हो चुका है। इसके अतिरिक्त, कुशल ज्योतिषियों ने समझाया है कि ग्रह किस प्रकार एक-दूसरे को केवल पीड़ा पहुँचाते हैं। इसलिए, जब जीव इन ग्रहों और भौतिक शरीर से अलग है, तो वह अपना क्रोध किसके प्रति प्रकट करे?
And if we examine the concept that the planets are the immediate causes of happiness and misery, how does it relate to the eternal Self? After all, the planets affect only those things which have already been born. Besides, skilful astrologers have shown how the various planets cause only pain to each other. Therefore, the soul, which is separate from the planets and the body, on whom should it vent its anger?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥