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bhagavat 11.23.46: यदि किसी का मन पूर्णतया स्थिर और शांत है, तो मुझे बताइए कि उसे कर्मकांडी दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने की क्या आवश्यकता है? और यदि किसी का मन अनियंत्रित है, अज्ञान में डूबा हुआ है, तो उसके लिए ये सब क्या काम आएंगे?   |   bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  11.23.46 
समाहितं यस्य मन: प्रशान्तं
दानादिभि: किं वद तस्य कृत्यम् ।
असंयतं यस्य मनो विनश्यद्
दानादिभिश्चेदपरं किमेभि: ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
यदि किसी का मन पूर्णतया स्थिर और शांत है, तो मुझे बताइए कि उसे कर्मकांडी दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने की क्या आवश्यकता है? और यदि किसी का मन अनियंत्रित है, अज्ञान में डूबा हुआ है, तो उसके लिए ये सब क्या काम आएंगे?
 
If someone's mind is completely stable and peaceful, then tell me what is the need for a person to perform ritualistic charity and other pious deeds? And if someone's mind remains unrestrained and immersed in ignorance, then what is the benefit of these deeds for him?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)