बौद्धिक विवेक भौतिक गुणों को कार्यशील करता है, जिसके फलस्वरूप सत्व, रज और तम गुणों से सम्बद्ध विभिन्न प्रकार के भौतिक गतिविधियाँ विकसित होती हैं। इन गुणों वाले कार्यों से संगत जीवन-दशाएँ उत्पन्न होती हैं।
A powerful mind activates the physical qualities, which gives rise to various types of physical activities related to the modes of goodness, ignorance and passion. The activities of each of these qualities give rise to corresponding life conditions (movements).
तात्पर्य
अच्छाई के स्वरूप में मनुष्य स्वयं को संत या बुद्धिमान व्यक्ति मानता है, आसक्ति के स्वरूप में मनुष्य भौतिक सफलता के लिए संघर्ष करता है और अज्ञानता के स्वरूप में मनुष्य क्रूर, आलसी और पापी बन जाता है। भौतिक स्वरूपों के संयोजन के द्वारा मनुष्य खुद को अर्ध-देवता, राजा, अमीर पूंजीपति, बुद्धिमान विद्वान आदि के रूप में पहचानता है। ये अवधारणाएँ प्रकृति के स्वरूपों से उत्पन्न भौतिक पदनाम हैं और ये अस्थायी इंद्रिय संतुष्टि का आनंद लेने के लिए शक्तिशाली मन की प्रवृत्ति के अनुसार स्वयं को व्यवस्थित करते हैं। इस श्लोक में "बेहद मजबूत" के अर्थ वाले "बलियस" शब्द का अर्थ है कि भौतिक मन बुद्धिमान सलाह के प्रति असंवेदनशील हो जाता है। भले ही हमें बताया जाए कि हम पैसे कमाने के लिए बहुत सारे पाप और अपराध कर रहे हैं, फिर भी हम यह सोच सकते हैं कि पैसा हर कीमत पर हासिल किया जाना चाहिए, क्योंकि इसके बिना कोई न तो धार्मिक समारोह कर सकता है और न ही सुंदर महिलाओं, हवेली और वाहनों के साथ इंद्रियों को संतुष्ट कर सकता है। एक बार पैसा प्राप्त हो जाने पर, व्यक्ति को और भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस संबंध में जिद्दी मन कभी भी अच्छी सलाह पर ध्यान नहीं देगा। इसलिए अवंति के ब्राह्मण द्वारा यहाँ दिए गए उदाहरण के अनुसार मानसिक रचना को त्यागना होगा और कृष्ण चेतना में मन को नियंत्रित करना होगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥