Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.34: इनमें से कुछ लोग तो उसका संन्यासी दण्ड छीन लेते और कुछ उस जलपात्र को, जिसे वह भिक्षापात्र की तरह इस्तेमाल कर रहा था। कोई उसका मृगचर्म आसन तो कोई उसकी जपमाला ले लेता और कुछ उसकी फटी-पुरानी गुदड़ी चुरा लेते; वे ये सब चीजें उसे दिखाकर वापस करने का बहाना करते किन्तु उन्हें फिर छिपा देते। | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केचित्त्रिवेणुं जगृहुरेके पात्रं कमण्डलुम् ।
पीठं चैकेऽक्षसूत्रं च कन्थां चीराणि केचन ।
प्रदाय च पुनस्तानि दर्शितान्याददुर्मुने: ॥ ३४ ॥
अनुवाद
इनमें से कुछ लोग तो उसका संन्यासी दण्ड छीन लेते और कुछ उस जलपात्र को, जिसे वह भिक्षापात्र की तरह इस्तेमाल कर रहा था। कोई उसका मृगचर्म आसन तो कोई उसकी जपमाला ले लेता और कुछ उसकी फटी-पुरानी गुदड़ी चुरा लेते; वे ये सब चीजें उसे दिखाकर वापस करने का बहाना करते किन्तु उन्हें फिर छिपा देते।
Some of them would snatch away his ascetic staff, some the water pot he was using as a begging bowl. Some would take away his deerskin mat, some his rosary and some would steal his torn old blanket; they would show him these things and pretend to return them but would hide them again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥