Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.3: जो तीखे-तीखे बाण सीधे हृदय को बेध कर पार चले जाते हैं, वे उतने कष्ट नहीं पहुंचाते जितने की असभ्य पुरुषों द्वारा बोले जाने वाले, कटु व अपमानजनक शब्दरूपी तीर पहुंचाते हैं जो कि हृदय के बहुत अंतिम सिरे तक धंस कर नुकीले कांटे की तरह चुभते रहते हैं। | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तथा तप्यते विद्ध: पुमान् बाणैस्तु मर्मगै: ।
यथा तुदन्ति मर्मस्था ह्यसतां परुषेषव: ॥ ३ ॥
अनुवाद
जो तीखे-तीखे बाण सीधे हृदय को बेध कर पार चले जाते हैं, वे उतने कष्ट नहीं पहुंचाते जितने की असभ्य पुरुषों द्वारा बोले जाने वाले, कटु व अपमानजनक शब्दरूपी तीर पहुंचाते हैं जो कि हृदय के बहुत अंतिम सिरे तक धंस कर नुकीले कांटे की तरह चुभते रहते हैं।
The sharp arrows that pierce the chest and reach the heart do not hurt as much as the arrows of harsh, insulting words spoken by uncivilized men which penetrate deep into the heart.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥