Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.29: यदि मेरे जीवन में कुछ समय बचता है, तो मैं तप करूँगा और अपने शरीर की जरूरतों को कम कर दूँगा। मैं अब और अधिक भ्रम में न पड़ कर जीवन में अपने पूरे आत्म-हित में लग जाऊँगा और अपने आप में ही संतुष्ट रहूँगा। | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽहं कालावशेषेण शोषयिष्येऽङ्गमात्मन: ।
अप्रमत्तोऽखिलस्वार्थे यदि स्यात् सिद्ध आत्मनि ॥ २९ ॥
अनुवाद
यदि मेरे जीवन में कुछ समय बचता है, तो मैं तप करूँगा और अपने शरीर की जरूरतों को कम कर दूँगा। मैं अब और अधिक भ्रम में न पड़ कर जीवन में अपने पूरे आत्म-हित में लग जाऊँगा और अपने आप में ही संतुष्ट रहूँगा।
If I have any time left in my life, I will practice tapasya and reduce my bodily needs to the minimum. I will no longer be confused and will focus on the overall self-interest of life and be satisfied with myself.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥