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bhagavat 11.23.25: सुविवेकशील व्यक्ति अपने धन, यौवन और शक्ति को पूर्णता प्राप्त करने में लगा पाते हैं। पर मैंने इन सबको अपने धन के लाभ के लिए व्यर्थ ही गँवा दिया। अब जब मैं बूढ़ा हो चुका हूँ, तो मैं क्या प्राप्त कर सकता हूँ?   |   bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  11.23.25 
व्यर्थयार्थेहया वित्तं प्रमत्तस्य वयो बलम् ।
कुशला येन सिध्यन्ति जरठ: किं नु साधये ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
सुविवेकशील व्यक्ति अपने धन, यौवन और शक्ति को पूर्णता प्राप्त करने में लगा पाते हैं। पर मैंने इन सबको अपने धन के लाभ के लिए व्यर्थ ही गँवा दिया। अब जब मैं बूढ़ा हो चुका हूँ, तो मैं क्या प्राप्त कर सकता हूँ?
 
Prudent people are able to use their wealth, youth and strength to achieve success. But I have wasted them in a futile effort to increase my wealth in excitement. Now that I have grown old, what can I achieve?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)