जो व्यक्ति अपनी संपत्ति को उचित भागीदारों—देवता, ऋषि, पितृ, और सामान्य जीव—और अपने परिवार के सदस्यों, ससुराल वालों, और स्वयं के बीच वितरित नहीं करता, वह अपनी संपत्ति को केवल एक यक्ष की तरह रखता है और अधोगति को प्राप्त होगा।
A person who does not distribute his wealth among the proper shareholders - the gods, sages, ancestors, living entities in general, and among his close relatives, in-laws and himself - merely maintains his wealth like a Yakshha and will be degraded.
तात्पर्य
जो अपना धन उपर्युक्त प्राधिकृत व्यक्तियों के साथ नहीं बाँटता है और स्वयं धन का उपभोग भी नहीं करता तो उसे निश्चित रूप से जीवन में असीमित समस्याएं झेलनी पड़ती हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥