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bhagavat 11.23.20: यहाँ तक कि इंसान के सगे भाई, पत्नी, माँ-बाप और दोस्त जो उससे प्यार से बंधे होते हैं, एक सिक्के के लिए तुरंत ही अपनी स्नेहपूर्ण रिश्ता तोड़कर दुश्मन बन जाते हैं।   |   bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  11.23.20 
भिद्यन्ते भ्रातरो दारा: पितर: सुहृदस्तथा ।
एकास्‍निग्धा: काकिणिना सद्य: सर्वेऽरय: कृता: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि इंसान के सगे भाई, पत्नी, माँ-बाप और दोस्त जो उससे प्यार से बंधे होते हैं, एक सिक्के के लिए तुरंत ही अपनी स्नेहपूर्ण रिश्ता तोड़कर दुश्मन बन जाते हैं।
 
Even a man's own brothers, wife, parents and friends who were bound to him with love, instantly break their affection and become his enemies for a pittance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)