श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  11.23.18-19 
स्तेयं हिंसानृतं दम्भ: काम: क्रोध: स्मयो मद: ।
भेदो वैरमविश्वास: संस्पर्धा व्यसनानि च ॥ १८ ॥
एते पञ्चदशानर्था ह्यर्थमूला मता नृणाम् ।
तस्मादनर्थमर्थाख्यं श्रेयोऽर्थी दूरतस्त्यजेत् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
चोरी, हिंसा, झूठ बोलना, बेईमानी करना, कामुकता, क्रोध, भ्रम, घमंड, झगड़ा, दुश्मनी, विश्वासघात, ईर्ष्या, स्त्रियों के कारण होने वाले खतरे, जुआ और नशा ये पंद्रह ऐसे दुर्गुण हैं जो धन के लालच के कारण मनुष्यों को दूषित करते हैं। हालाँकि ये दुर्गुण हैं, लेकिन लोग गलत तरीके से इन्हें महत्व देते हैं। इसलिए जो व्यक्ति जीवन का असली लाभ उठाना चाहता है, उसे अवांछित भौतिक संपत्ति से खुद को दूर रखना चाहिए।
 
चोरी, हिंसा, झूठ बोलना, बेईमानी करना, कामुकता, क्रोध, भ्रम, घमंड, झगड़ा, दुश्मनी, विश्वासघात, ईर्ष्या, स्त्रियों के कारण होने वाले खतरे, जुआ और नशा ये पंद्रह ऐसे दुर्गुण हैं जो धन के लालच के कारण मनुष्यों को दूषित करते हैं। हालाँकि ये दुर्गुण हैं, लेकिन लोग गलत तरीके से इन्हें महत्व देते हैं। इसलिए जो व्यक्ति जीवन का असली लाभ उठाना चाहता है, उसे अवांछित भौतिक संपत्ति से खुद को दूर रखना चाहिए।
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