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bhagavat 11.23.17: सम्पत्ति कमाने, प्राप्त करने, बढ़ाने, बचाने, खर्च करने, हानि होने और उपभोग करने में सभी मनुष्यों को बहुत अधिक परिश्रम, भय, चिंता और गलतफहमी का सामना करना पड़ता है।   |   bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  11.23.17 
अर्थस्य साधने सिद्धे उत्कर्षे रक्षणे व्यये ।
नाशोपभोग आयासस्‍‍‍‍‍त्रासश्चिन्ता भ्रमो नृणाम् ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
सम्पत्ति कमाने, प्राप्त करने, बढ़ाने, बचाने, खर्च करने, हानि होने और उपभोग करने में सभी मनुष्यों को बहुत अधिक परिश्रम, भय, चिंता और गलतफहमी का सामना करना पड़ता है।
 
All human beings experience great labour, fear, worry and confusion in earning, obtaining, increasing, protecting, spending, losing and consuming wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)