Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.12: अंत में, जब उसकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई, तो वह ब्राह्मण, जिसने कभी धर्म या इंद्रिय-भोग में लिप्त नहीं था, अपने परिवार के सदस्यों द्वारा उपेक्षित रहने लगा। इस प्रकार, उसे असहनीय चिंता का अनुभव होने लगा। | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एवं द्रविणे नष्टे धर्मकामविवर्जित: ।
उपेक्षितश्च स्वजनैश्चिन्तामाप दुरत्ययाम् ॥ १२ ॥
अनुवाद
अंत में, जब उसकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई, तो वह ब्राह्मण, जिसने कभी धर्म या इंद्रिय-भोग में लिप्त नहीं था, अपने परिवार के सदस्यों द्वारा उपेक्षित रहने लगा। इस प्रकार, उसे असहनीय चिंता का अनुभव होने लगा।
Finally, when his wealth was completely destroyed, the Brahmin who had never followed religion or sensual pleasures, started being neglected by his family members. Thus, he started experiencing unbearable anxiety.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥