Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.23.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जैसे ही सर्वश्रेष्ठ भक्त श्री उद्धव ने दाशार्ह नेता भगवान मुकुंद से विनम्रतापूर्वक आग्रह किया, तो सबसे पहले उन्होंने अपने सेवक के कथन को उचित माना। तब वे भगवान, जिनके गौरवपूर्ण कारनामे सुनने के योग्य हैं, ने उद्धव को उत्तर देना शुरू किया। | bhagavat अध्याय 11.23: अवन्ती ब्राह्मण का गीत । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीबादरायणिरुवाच
स एवमाशंसित उद्धवेन
भागवतमुख्येन दाशार्हमुख्य: ।
सभाजयन् भृत्यवचो मुकुन्द-
स्तमाबभाषे श्रवणीयवीर्य: ॥ १ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जैसे ही सर्वश्रेष्ठ भक्त श्री उद्धव ने दाशार्ह नेता भगवान मुकुंद से विनम्रतापूर्वक आग्रह किया, तो सबसे पहले उन्होंने अपने सेवक के कथन को उचित माना। तब वे भगवान, जिनके गौरवपूर्ण कारनामे सुनने के योग्य हैं, ने उद्धव को उत्तर देना शुरू किया।
Sukadeva Goswami said: When Sri Uddhava, the best of devotees, thus respectfully requested Lord Mukunda, the head of the tenfold path, He first accepted the appropriateness of His servant's statement. Then the Lord, whose glorious deeds are most worthy of being heard, began to tell him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥