कर्मों के बंधन में बद्ध आत्मा अपने सकाम कर्मों के कारण घूमने के लिए बाध्य होती है। सतोगुण के संपर्क से वह ऋषियों या देवताओं के बीच जन्म लेता है। रजोगुण के संपर्क से वह असुर या मनुष्य बनता है। और तमोगुण की संगति से वह भूत-प्रेत या पशु-जगत में जन्म लेता है।
Forced to wander by his fruitive actions, the bound soul, in association with the mode of goodness, is born among sages or demigods. In association with the mode of passion he becomes a demon or a human being, and in the mode of ignorance he is born in the world of ghosts or spirits.
तात्पर्य
तिर्यकत्वम शब्द का अर्थ है "एक पशु की स्थिति," जिसमें जीवन के सभी निम्न रूप शामिल हैं, जैसे जानवर, पक्षी, कीट, मछली और पौधे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥