तरोर्बीजविपाकाभ्यां यो विद्वाञ्जन्मसंयमौ ।
तरोर्विलक्षणो द्रष्टा एवं द्रष्टा तनो: पृथक् ॥ ५० ॥
अनुवाद
बीज से वृक्ष को जन्म लेते देखना और परिपक्वता के बाद वृक्ष की मृत्यु को देखना एक अलग व्यक्ति का काम है, जो वृक्ष से अलग रहता है और साक्षी बनता है। इसी तरह, शरीर के जन्म और मृत्यु का साक्षी शरीर से अलग रहता है।
A person who sees a tree being born from a seed and also sees the death of that tree when it attains maturity, definitely becomes a clear witness by remaining separate from the tree. Similarly, the witness of the birth and death of the physical body remains separate from the body.
तात्पर्य
वृक्षों के लिए उनकी मृत्यु की स्थिति को विपाक कहते हैं। धान जैसे अन्य प्रकार के पौधों के संदर्भ में विपाक उनके परिपक्वावस्था को इंगित करता है जिसमे मृत्यु भी आती है। तो हम साधारण अवलोकन द्वारा अपने भौतिक स्तर और खुद के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक की स्थति को समझ सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥